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अपनी यात्रा की शुरुआत ऋषिकेश स्थित अपने होटल से सुविधाजनक पिकअप के साथ करें। देवप्रयाग के लिए प्रस्थान करें, जो ऋषिकेश से 75 किलोमीटर दूर है।
पहला पड़ाव: वशिष्ठ गुफा। रास्ते में या वापसी में सबसे पहले वशिष्ठ गुफा का दर्शन करें, यह खुलने और बंद होने के समय पर निर्भर करेगा। ऋषिकेश के पास स्थित यह प्राचीन गुफा वह स्थान है जहाँ सात महान ऋषियों (सप्तऋषियों) में से एक ऋषि वशिष्ठ ने वर्षों तक ध्यान किया था। ध्यान और आत्मचिंतन के लिए आदर्श इस पवित्र स्थल की शांति का अनुभव करें।
यह एक पवित्र नगर है जहाँ भागीरथी और अलकनंदा नदियाँ मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती हैं। इस दिव्य संगम के साक्षी बनें, संभव हो तो वहाँ स्नान करें। इसे गंगा नदी के नामकरण का उद्गम स्थल माना जाता है।
इसके बाद, कुछ सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर स्थित सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन रघुनाथ मंदिर के दर्शन करें। संगम स्थल से कुछ ही कदम ऊपर मंदिर तक पहुँचने में 15 मिनट लगते हैं। यह एक पवित्र स्थल है जहाँ माना जाता है कि भगवान राम ने तपस्या की थी। इस ऐतिहासिक मंदिर के आध्यात्मिक वातावरण में स्वयं को लीन कर लें।
यात्रा सुझाव: रघुनाथ मंदिर प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक बंद रहता है, इसलिए अपनी यात्रा की योजना उसी के अनुसार बनाएं।
ऊपर से सड़क किनारे कार पार्किंग स्थल पर वापस आएं, ड्राइवर से मिलें और ऋषिकेश की ओर वापस चलें। रास्ते में ड्राइवर से तीन धारा व्यू पॉइंट पर रुकने के लिए कहें, जहां से आपको नदी के किनारों का मनमोहक दृश्य देखने को मिलेगा।
यात्रा सुझाव: वशिष्ठ गुफा प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक बंद रहती है, इसलिए अपनी यात्रा की योजना उसी के अनुसार बनाएं।
गंगा नदी के किनारे मनोरम दृश्यों का आनंद लेते हुए ड्राइव करें, जिसमें फोटोग्राफी और घूमने-फिरने के लिए समय आवंटित किया गया है।